कुछ घुड़सवारी हो जाए क्यों भाई चेतक
चल मेरे घोड़े टिक-टिक-टिक 
इन्तेहाँ हो गई इंतजार की
सोच रहा हूँ कौन सा वाला गजरा लूँ
चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है
मुझे पेड़-पौधों से बहुत प्यार है
शाम हो गई चलो अब कहीं घूम ही आते हैं
छाया चित्र - राज लाठिया
दर्री "कोरबा"